Akbar Birbal ki Kahani in Hindi - अकबर का ईनाम
एक बार बादशाह अकबर ने । अपने राज्य मे ये जानने की कोशिश की । कि कितने घर मर्दों से चलते हैं और कितने औरतो से ।इस बात की पुष्टि करने का काम अकबर ने बीरबल को दिया । बीरबल ने सारे नगर को यह सूचना दिया की जिसके घर में मर्दों की चलती हो वो राजा साहब के दरबार से एक अपनी पसंद का घोड़ा ले। जाए और जिसके घर में औरत की चलती हो वह एक अनार ले जाए ।
महाराज अकबर के दरबार मे अनार ले जाने वाले लोग की भीड़ लग गई। यह नजारा देख अकबर सोच में पड़ गए । तभी ही एक नौजवान पठान दरबार मे आया और बोला । महाराज मुझको घोड़ा देदो मेरे घर में मेरी ही चलती है ।यह देखकर अकबर प्रसन्न हुया और बोला बताओ तुमको कौन सा घोड़ा चाहिए।वह नौजवान बोला । महाराज आप मुझको काला घोड़ा दे दीजिए । अकबर ने उसको कला घोड़ा दे दिया।। घोड़ा लेजाने के कुछ देर बाद वह नौजवान वापस लौट कर आया और बोला । महाराज मुझको कला नही लाल घोड़ा चाहिए । मेरी बीवी यह बोल रही है की कला रंग अशुभ होता है।
इसको वापस करके आप लाल घोड़ा ले आओ उस नौजवान की यह बात सुनकर ।बीरबल बोला तुम भी अनार ही लेकर जाओ क्योंकि तुम्हार घर में तुम्हारी बीवी की चलती है उसके कहने पर ही तुम ये काला घोड़ा वापस करने आए हो । ऐसे ही करते करते सुबह से शाम हो गई।
लेकिन किसी के भी घर एक भी घोड़ा नही गया । शाम को बीरबल महाराज अकबर से बोला जहापना आपने जिनके घर में बीवी की चलती है । उनको अनार क्यों दिया है । कुछ अनाज देना चाहिए था मेरी बीवी मुझसे कह रही थी । की तुम तो महाराज के चहीते हो तुम उनसे बोल सकते थे ।
की वो ईनाम में अनाज या दाले देते ।बीरबल की यह बात सुनकर अकबर बादशाह बोले ।लेकिन मेरी पत्नी जिद्दी है। उसने ही मुझसे ईनाम में अनार देने को कहा था । अकबर की यह बात सुनकर बीरबल हसा और बोला जिस राज्य के राजा की ही अपने घर में नहीं चलती हो तो प्रजा बेचारी क्या करेगी ।
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